भाग – 6 श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग का रहस्य
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- Anurag Singh
- September 30, 2022
- Uncategorized देश धार्मिक
प्रिय पाठको 12 ज्योतिर्लिंग की श्रेणी में अब तक हम आपने 5 ज्योतिर्लिंग के रहस्य के बारे में जाना। आज हम उसी क्रम में अगले ज्योतिर्लिंग के बारे में जानेंगे। 12 ज्योतिर्लिंगों में से ६वे ज्योतिर्लिंग को श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के नाम से जानते हैं। भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग महाराष्ट्र राज्य के सहाद्रि नामक पर्वत पर स्थित है, जो पुणे से 100 किलोमीटर की दूरी पर है। इस ज्योतिर्लिंग को भीमेश्वर ज्योतिर्लिंग के नाम से भी जाना जाता है। आइए जानते हैं इस भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति का रहस्य
पुराणों के अनुसार प्राचीन काल में भीम नाम का राक्षस था | भीम राक्षस कोई और नहीं राक्षसों के राजा रावण के छोटे भाई कुम्भकर्ण का वंशज है। भीम, कुंभकरण तथा कर्कटी का पुत्र थ। जब कुम्भकर्ण का वध प्रभु श्री राम ने किया तब भीम बहुत छोटा थ। भीम जैसे ही बढ़ा हुआ उसने अपनी माता से अपने पिता के बारे में पूछा। उसकी माता कर्कटी ने उसे बताया कि श्री हरि के अवतार श्री राम ने कैसे उसके पिता और उनके भाइयों का वध किया। अपने पिता की मृत्यु के बारे में जानकर उसे अत्यंत क्रोध हुआ। उसने मन ही मन सभी देवताओं और श्रीहरि पर विजय प्राप्त करने का निर्णय कर लिया | उसने आपार शक्ति प्राप्त करने के लिए ब्रम्हा जी की 1000 वर्षो तक कठिन तपस्या की इसकी इस घोर तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रम्हाजी ने उसे दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा। राक्षस भीम ने वरदान के रूप में ब्रह्मा जी से अपारशक्ति मांगी जिससे वह तीनो लोको पर विजय प्राप्त कर सकें। क्योंकि ब्रह्मा जी उसकी तपस्या से प्रसन्न थे इसलिए उसे वरदान दे दिया।

वरदान पाकर राक्षस भीम ने अपना बदला पूरा करने का निश्चय किया उसने बदले की शुरुआत देव लोक में आक्रमण करके की। क्योंकी उससे वरदान प्राप्त था इसलिए देवता ही नहीं देवराज इन्द्र भी उससे परास्त हो गए और उन्हें स्वर्ग लोक को छोडना पड़ा। देवो को परास्त करने के बाद भीम श्री हरी से युद्ध लड़ने केलिए गया। ब्रम्हा जी का वरदान झूठा न जाये इसलिए श्री हरी उससे युद्ध में पराजित हो गए। श्री हरी को पराजित करने के बाद भीम राक्षस धरती लोक में गया और वहां भी ऋषि मुनियो को प्रताड़ित करने लगा और साथ ही साथ पूजा पाठ का कार्य बंद कराने लगा। धरती में हाहकार होने लगा।
उसी समय कामरूप नगर में राजा सुदक्षिण का राज था। राजा सुदक्षिण , भगवान् शिव के परम भक्त थे। भगवान् शिव भी राजा सुदक्षिण को अपना परम भक्त मानते थे। राक्षस भीम ने भगवन शिव के परम भक्त को भी नहीं छोड़ा उन्हें भी बंदी बनाकर कारगर में डाल दिया। भीम के अत्याचार से तंग आकर सभी देवतागण और ऋषि मुनि भगवान् शंकर के पास गए और उसका वध करने को कहा। भगवान् शिव ने उन्हें सही समय आने तक रुकने को कहा।
एक बार राजा सुदर्शन बन्दीघर में भगवान् शिव की पार्थिव मूर्ति बना कर उनकी पूजा कर रहा था। जैसे ही यह बात राक्षस भीम को पता चली वह बंदी गृह में गया और राजा से पूजा बंद करने को कहा। राजा ने मना कर दिया तब सुदक्षिण भीम ने अपनी तलवार निकली और जैसे ही वहां स्थित शिवलिंग पर वार करना चाहा तुरंत उस शिवलिंग से साच्छात भगवान् शिव प्रकट हुए। भगवान् शिव ने अपनी धनुष से भीम की तलवार के टुकड़े कर दिए तथा अपनी हुंकार मात्रे से राक्षस भीम को जलाकर भस्म कर दिया।

तभी वहां सभी देवतागण आये और भगवान् शिव से प्राथना की यह स्थान इस राक्षस के कृत्यों से बहुत ही अपवित्र हो गया है इसलिए आप इस ज्योतिर्लिंग में निवास करे जिससे यहाँ लोगो का उद्धार हो सके और यह स्थान पवित्र हो जाये। भगवान् शिव ने उनकी प्राथना स्वीकार कर ली और उसी शिवलिंग में सदा के लिए वास करने लग।
क्युकी भगवान् शिव ने यहां शिवलिंग से निकल कर राक्षस भीम को पराजित करके भस्म किया था इसलिए इस ज्योतिर्लिंग का नाम भीमाशंकर पड गया। क्युकी इस ज्योतिर्लिंग का आकर बूट मोटा है इसलिए इससे मोटेश्वर महादेव के नाम से भी जानते है। ऐसे मान्यता है की जो व्यक्ति सूर्योदय के समय इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है उसके सात जन्मो के पाप मिट जाते है तथा उसके लिए स्वर्ग के मार्ग खुल जाते है।
पुराणों के अनुसार यह ज्योतिर्लिंग कामरूप नगर में स्थित है। कामरूप नगर पुणे में स्थित है साथ ही असम राज्य का पूरा नाम कामरूप है इसलियए कुछ विद्वानों के अनुसार यह ज्योतिर्लिंग असम राज्य में है।
पाठको आपको श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति का रहस्य जानकर कैसा लगा हमे कमेण्ट करके अवश्य बताये और जुड़े रहिये हमारे चैनल jan saathi media house के साथ।
धन्यवाद
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