ईरान बनाम इस्राइल: युद्धविराम पर भी छिड़े हमले, ट्रंप बोले- अब और नहीं चलेगा ये खेल!
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- June 24, 2025
- Uncategorized तकनिकी/ टेक्नोलॉजी लेटेस्ट न्यूज़ विदेश
पश्चिम एशिया में उबाल: ईरान-इस्राइल युद्धविराम फिर टूटा, ट्रंप ने जताई नाराजगी
संघर्ष की आग फिर भड़की
पश्चिम एशिया में एक बार फिर हालात अस्थिर हो गए हैं। ईरान और इस्राइल के बीच हाल ही में जो युद्धविराम लागू किया गया था, वह चंद घंटों में ही टूट गया। इस घटनाक्रम पर अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने ईरान और इस्राइल दोनों को युद्धविराम का उल्लंघन करने के लिए आड़े हाथों लिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर कई पोस्ट साझा किए।
ट्रंप की पहली प्रतिक्रिया: “बम मत गिराओ इस्राइल”
डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में लिखा, “इस्राइल, बम मत गिराओ। अगर तुम ऐसा करते हो तो यह बड़ा उल्लंघन होगा। अपने पायलटों को तुरंत वापस बुलाओ!” यह चेतावनी तब आई जब खबरें आईं कि इस्राइली विमानों ने फिर से ईरानी ठिकानों पर बमबारी की है। ट्रंप ने कहा कि इस्राइल और ईरान दोनों ने संघर्ष विराम के नियमों का उल्लंघन किया है और इस स्थिति से वह बेहद नाराज हैं।
दूसरी प्रतिक्रिया: “ईरान पर हमला नहीं करेगा इस्राइल”
कुछ घंटों बाद ट्रंप ने एक और पोस्ट किया जिसमें उन्होंने लिखा, “इस्राइल ईरान पर हमला नहीं करेगा। सभी विमान पलटकर घर लौटेंगे और ईरान के प्रति दोस्ताना ‘प्लेन वेव’ करेंगे। किसी को कोई नुकसान नहीं होगा, युद्धविराम लागू है!” हालांकि इसी पोस्ट के कुछ ही मिनटों बाद उन्होंने यह भी लिखा कि “ईरान कभी भी अपनी परमाणु सुविधाओं का पुनर्निर्माण नहीं करेगा।”
नेतन्याहू ने भी माना दबाव
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजमिन नेतन्याहू ने स्वीकार किया कि उन्होंने ट्रंप के साथ बातचीत के बाद ईरान के खिलाफ ‘कठोर हमला’ रोकने का फैसला किया। यह बयान ट्रंप के दबाव को दर्शाता है जो उन्होंने इस्राइल पर डाला कि वह आक्रमण से पीछे हटे।
युद्धविराम का उल्लंघन: क्या हुआ मंगलवार को?
युद्धविराम मंगलवार तड़के लागू होना था, लेकिन उसके कुछ समय बाद ही इस्राइल ने आरोप लगाया कि ईरान ने उसके हवाई क्षेत्र में मिसाइलें दागीं। हालांकि ईरान ने इस बात से इनकार किया। फिर भी उत्तरी इस्राइल में धमाकों और सायरन की आवाजों की पुष्टि हुई।
इस्राइली सेना के अनुसार, उसने दो ईरानी मिसाइलों को उड़ान में ही नष्ट कर दिया। इस स्थिति ने युद्धविराम की वैधता और भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए।
12 दिन की जंग और संघर्ष की पृष्ठभूमि
यह तनाव 12 दिन पहले शुरू हुआ जब इस्राइल ने ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हमला किया। इस्राइल का दावा है कि ईरान गुपचुप तरीके से परमाणु हथियार विकसित कर रहा है, जबकि ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा उत्पादन और चिकित्सा अनुसंधान के लिए है।
इस संघर्ष में अमेरिका भी खुलकर शामिल हुआ और उसने ईरान के भूमिगत परमाणु ठिकानों पर ‘बंकर बस्टर’ बम गिराए। इससे क्षेत्रीय तनाव कई गुना बढ़ गया।
अमेरिका की भूमिका: मध्यस्थ या भागीदार?
अमेरिका, विशेष रूप से ट्रंप प्रशासन, इस पूरी प्रक्रिया में सक्रिय रहा है। जब सोमवार को ईरान ने कतर स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर जवाबी हमला किया, तब ट्रंप ने ही युद्धविराम की घोषणा की थी। दोनों देशों ने इस पहल को स्वीकार कर लिया था, लेकिन इसके तुरंत बाद हमले फिर शुरू हो गए।
ट्रंप का दावा है कि वह ईरान में शासन परिवर्तन की उम्मीद नहीं कर रहे हैं, बल्कि वह शांति चाहते हैं। लेकिन उनके बयानों में सख्त तेवर भी दिखते हैं, जिससे यह संदेश जाता है कि अमेरिका किसी भी परिस्थिति में ईरान को परमाणु शक्ति बनने नहीं देगा।
इस्राइल की आंतरिक राजनीति भी गर्म
इस्राइल के वित्त मंत्री बेत्सालेल स्मोटरिच ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर लिखा, “तेहरान कांपेगा।” उनका यह बयान स्पष्ट करता है कि इस्राइली सरकार के अंदर भी एक आक्रामक तबका है जो ईरान को सबक सिखाने के पक्ष में है।
इस बयान के बाद यह कयास लगाए जा रहे हैं कि इस्राइल का युद्धविराम लंबे समय तक नहीं टिकेगा और वह किसी भी क्षण फिर से आक्रामक हो सकता है।
क्षेत्रीय प्रतिक्रियाएं और वैश्विक चिंता
पश्चिम एशिया के अन्य देशों ने इस संघर्ष पर गंभीर चिंता जताई है। सऊदी अरब, तुर्की, मिस्र और संयुक्त अरब अमीरात ने संयम बरतने की अपील की है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी शांति बनाए रखने की अपील की है और चेताया है कि यह संघर्ष पूरे क्षेत्र को युद्ध की आग में झोंक सकता है।
परमाणु हथियारों को लेकर चिंता
ईरान की परमाणु गतिविधियों को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता अब और बढ़ गई है। अमेरिका, इस्राइल और यूरोपीय देशों को आशंका है कि ईरान अपने गुप्त कार्यक्रम के ज़रिए कुछ ही महीनों में परमाणु हथियार बना सकता है।
हाल ही में आईएईए (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि ईरान ने यूरेनियम का संवर्धन 84% तक कर लिया है, जो हथियार बनाने के बेहद करीब है।
क्या युद्धविराम टिकेगा?
यह सबसे बड़ा सवाल है। अब तक की घटनाएं बताती हैं कि युद्धविराम केवल कागज़ी समझौता बनकर रह गया है। इस्राइल और ईरान के बीच भरोसे की भारी कमी है। ट्रंप की कोशिशें भले ही युद्ध रोकने की रही हों, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि दोनों देश किसी भी समय फिर से आमने-सामने आ सकते हैं।
क्या कहता है भारत?
भारत ने इस पूरे मामले पर संयमित रुख अपनाया है। विदेश मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता का पक्षधर है। भारत ने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है।
निष्कर्ष: एक और बड़ी जंग की आहट?
पश्चिम एशिया की इस नई उथल-पुथल में तमाम वैश्विक शक्तियों की दिलचस्पी है। जहां अमेरिका ट्रंप की अगुवाई में सैन्य रणनीति बना रहा है, वहीं रूस और चीन जैसे देश इस स्थिति का फायदा उठाने की फिराक में हैं। इस्राइल-ईरान युद्ध यदि पूरी तरह भड़कता है तो यह न केवल पश्चिम एशिया, बल्कि पूरी दुनिया की शांति व्यवस्था को हिला सकता है।
अब देखना यह होगा कि क्या ट्रंप और अन्य वैश्विक नेता इस सुलगती चिंगारी को बुझाने में सफल होते हैं या यह एक भयंकर युद्ध में बदल जाती है।
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