भाग-8 श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग
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- Anurag Singh
- January 5, 2023
- Uncategorized धार्मिक
ज्योतिर्लिंगों की श्रंखला में हम आज आपको 8वें ज्योतिर्लिंग के बारे में बताएँगे | १२ ज्योतिर्लिंगों में से 8वां ज्योतिर्लिंग है श्री त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग |
त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले से 60 km की दूरी पर स्थित ब्रम्भगिरि पर्वत के समीप स्थित है | इस ज्योतिर्लिंग के समीप ही गोदावरी नदी प्रवाहित होती है | आइये जानते है त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग की उत्पत्ति का रहस्य …
पुराणों के अनुसार , त्रम्बक नामक स्थान पर महर्षि गौतम अपनी पत्नी अहिल्या तथा अन्य ऋषि मुनियो के साथ रहते थे | इस स्थान पर एक बार कई वर्षो तक वर्षा नहीं हुई , तब महर्षि गौतम ने ६ माह तक वरुण देव की पूजा करके उन्हें प्रसन्न किया और वर्षा करने को कहा तब वरुण देव ने वहा एक विशाल गड्ढे में जल वर्षा कराकर उस स्थान में हरियाली वापस लाये |

कुछ दिनों पश्चात एक दिन यहा गौतम मुनि के शिष्य पानी भरने आये और उसी समय बाकि ऋषियों की पत्निया भी आई | ऋषि पत्निया पहले पानी भरना चाहती थी और शिष्ये भी पहले पानी भरना चाहते थे इस बात पर उनमे विवाद हो गया | तब गौतम मुनि की पत्नी अहिल्या आई और शिष्यों को पहले पानी भरने को कहा क्युकी शिष्य पहले आये थे | यह बात अन्य मुनि पत्नियों को नहीं लगी उन्होंने ये बात अपने अपने पतिमुनियो को बताई और कहा की ,” गौतम मुनि की तपस्या की वजह से यह पानी आया इसलिए उनकी पत्नी अहिल्या ने हमारा अपमान किया , आप सभी को इस अपमान का बदला गौतम मुनि से लेना होगा “|
अपनी पत्नियों की बातो में आकर बाकी मुनियो ने भगवान् गणेश की तपस्या करके उन्हें खुश कर दिया और वरदान के रूप में महर्षि गौतम के आश्रम से निष्काषित करने में उनकी मदद मांगी | भगवान् गणेश ने कहा ये सही नहीं आप कुछ और वर मांगे पर वे लोग नहीं माने | तब गणेश जी ने कहा मै तुम्हारी मदद तो कर दूंगा लेकिन इस पाप का फल आपको अवश्य मिलेगा | तब गणेशजी ने गाय का रूप रखा और महर्षि गौतम के पास गए | महर्षि गौतम ने गाय को देखकर उसे खाने को दिया परन्तु खाना खाते ही गाय मर गयी | तभी वहा छिपे बाकी मुनि आये और महर्षि गौतम पर गौ हत्या का आरोप लगाया | उन्होंने कहा तुमने गाय को मारा है तुम यहा से अपने परिवार को लेकर चले जाओ वरना हम पर भी गौ हत्या का पाप लग जायेगा | मुनियो की बात सुनकर महर्षि गौतम अपने परिवार के साथ आश्रम छोड़कर चले गए और दूर एक कुटिया बनाकर रहने लगे |
लकिन अन्य मुनियो को अब भी सुकून न आया तो वो गौतम मुनि के पास गए और उनका पूजा पाठ तथा यज्ञ कार्य बंद करने को कहा | महर्षि गौतम ने उनसे झमा मांगी और गौ हत्या के पाप का प्रश्चित करने का उपाय पुछा | तब बाकी मुनियो ने कहा , अगर तुम प्रश्चित करना चाहते हो तो तुम पृथ्वी की ३ बार परिक्रमा लगाकर वापस आओ फिर १ माह तक व्रत रखो फिर ब्रभगिरि पर्वत की १०१ बार परिक्रमा लगाकर तुम्हरी शुद्धि होगी अथवा तुम यहाँ गंगाजी को लाओ उसके जल से स्नान करके १ करोड़ पर्थिव शिवलिंग बनाकर उन शिवलिंगो की पूजा करो और फिर पुनः गंगा जी के जल से स्नान करके ११ बार ब्रम्भगिरी पर्वत की परिक्रमा लगाकर १०१ घडो में गंगाजी के जल से पार्थिव शिवलिंगो की आराधना करो तब तुम पाप मुक्त होंगे |
महर्षि गौतम ने अपनी पत्नी के साथ पूरी प्रक्रिया वैसे ही की जैसा बताया गया था और शिव जी की आराधना करने लगे | भगवान शिव उनकी तपस्या से प्र्शन्न होकर उन्हें दर्शन दिए और वरदान मांगने को कहा | गौतम मुनि ने भगवान् शिव से गौ हत्या के पाप से मुक्ति मांगी | शिवजी ने उन्हें पूरी बात बताई और कहा की तुम पापी नहीं हो , पापी वो बाकि मुनि है जिनको मै दंड अवश्य दूंगा | तब गौतम मुनि ने कहा आप उन्हें दंड न दे क्यों की अगर वो मेरे साथ छल नहीं करते तो मुझे आपके दर्शन कभी न होते , प्रभु अगर आप मुझे कोई वरदान देना चाहते है तो गंगाजी को इस प्रदेश में प्रवाहित कर दीजिये जिससे यहा के लोग भी पाप मुक्त हो जाये | भगवान् शिव ने उनकी बात सुनकर गंगा माता से आग्रह किया , गंगा माता ने भगवान् शिव से कहा की अगर पाप यहा एक शिवलिंग के रूप में सदा वास करेंगे तो मुझे भी अति प्रशन्नता होगी | भगवान शिव ने दोनों की मनोकमना पूरी करते हुए एक शिवलिंग के रूप में वास करने लगे और गंगा माता भी वहा धरा के रूप में प्रवाहित होने लगी , जो बाद में गोदावरी नदी के नाम से प्रशिद्ध हुई |
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